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Monday, July 19, 2021
सूचना का अधिनियम के तहत जानकारी साझा करने के विरुद्ध एकजुट हुए बैंक
विस्थापित व्यक्ति की अपेक्षा अतिक्रमणकर्ता को खाली पड़ी भूमि के नियमितीकरण का कोई अधिकार नहीं- सर्वोच्च न्यायालय
विवाहित होने के कारण लिव इन रिलेशनशिप मे रहने पर सेवा से बर्खास्तगी उचित नहीं: हाई कोर्ट (प्रयागराज)
इस आधार पर 31 अगस्त 2020 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश के विरूद्ध उसने विभागीय अपील की वह भी खारिज कर दी गई।
विभाग का मानना है कि उसका यह कार्य सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 और हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। याची के वकील ने तर्क प्रस्तुत किया कि मा उच्च न्यायालय ने अनीता यादव बनाम उत्तरप्रदेश राज्य के केस में इस प्रकार के मामले में बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया था। और इस मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अपील होने पर भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक अन्य मामले श्रवण कुमार पांडेय बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य के निर्णय का संदर्भ लेते हुए उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।
Saturday, July 17, 2021
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सब इंस्पेक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया में आवेदन की आयु सीमा का निर्धारण 1 जुलाई 2018 किये जाने का अंतरिम आदेश दिया
कोर्ट नंबर - 19
केस:- सर्विस सिंगल नंबर - 14612/2021
याचिकाकर्ता :- अभिषेक मिश्रा एवं अन्य Other
प्रतिवादी :- उत्तर प्रदेश राज्य
माननीय न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सब इंस्पेक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया में आवेदन करने की आयु सीमा का निर्धारण 1 जुलाई 2018 किया जाने का अंतरिम आदेश दिया है। उक्त आदेश जस्टिस चन्द्रधारी सिंह ने अभिषेक मिश्रा व 74 अन्य याचियों की याचिका को स्वीकार करते हुए याचीगण ने हाई कोर्ट में आवेदन करने के लिए आयु सीमा में छूट दिए जाने के लिए याचिका दाखिल की थी। याचियों के पक्षकार अधिवक्ता दीपक सिंह ने बताया कि सभी याचीगण 23 मार्च 2021 के भर्ती बोर्ड के अधियाचन में तय आयु सीमा से बाहर हो रहे थे, क्योंकि भर्ती बोर्ड व शासन द्वारा 2016 के उपरांत से इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर श्रेणी की कोई भी भर्ती प्रक्रिया का अधियाचन नहीं निकाला गया।
2017 से 2021 तक के सभी पदों का एक साथ अधियाचन 23 मार्च 2021 को भर्ती बोर्ड द्वारा जारी किया गया। इस अधियाचन में आयु सीमा का निर्धारण 2021 की तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया के हिसाब से किया गया था जबकि गृह विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में 2018 में मनीष सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के वाद में यह शपथ पत्र दिया गया था कि अगले चार वर्षों तक 3220 सब इंस्पेक्टर के पदों प्रतिवर्ष नियुक्ति के लिए अधियाचन जारी किए जाएंगे। इसके बाद भी शासन द्वारा 2016 के बाद से कोई भी सब इंस्पेक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया नहीं जारी की गई।
बकौल अधिवक्ता चार वर्षों की नियुक्तियों को एक साथ 23-03-2021 को अधियाचन द्वारा विज्ञापित कर दिया गया और आयु सीमा निर्धारण तत्काल से रखा गया। जिसकी वजह कई अभ्यर्थी ओवर एज होने के कारण फार्म नहीं भर पा रहे थे। इसके बाद याचियों ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए उसे स्वीकार किया व सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए सभी याचियों को 15 जुलाई 2021 की अंतिम तिथि तक आवेदन करने व भर्ती बोर्ड द्वारा उक्त आवेदन को स्वीकार करने का अंतरिम आदेश पारित किया।
राज्य को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
प्रत्युत्तर हलफनामा, यदि कोई हो, दो सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए।
07.09.2021 को सूचीबद्ध हो
आदेश दिनांक:- 14.7.221
अधिवक्ता परिषद गाज़ियाबाद इकाई द्वारा स्वाध्याय मंडल (स्टडी सर्किल) का आयोजन किया गया।
Friday, July 16, 2021
आगामी मानसून सत्र में नए विधेयक लाएगी केंद्र सरकार
सेवानिवृत्ति की आयु सीमा तय करना एक नीतिगत मामला, इसमें हाई कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये : सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि, "क्या सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाई जानी चाहिए यह नीतिगत मामला है। यदि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, तो जिस तिथि से इसे लागू की जानी चाहिए वह नीति के दायरे में आती है।" कोर्ट ने कहा कि निर्णय की दुर्बलता इस तथ्य में निहित है कि उच्च न्यायालय ने नीति निर्माण के दायरे में प्रवेश किया है और कार्यपालिका के क्षेत्र में आने वाले मामले पर अधिकार क्षेत्र को अपने लिए ग्रहण कर लिया है। क्या सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाई जानी चाहिए और यदि हां, तो जिस तिथि से इसे लागू किया जाना चाहिए वह नीतिगत मामला है जिसमें उच्च न्यायालय को प्रवेश नहीं करना चाहिए था।
न्यायालय ने कहा कि 30 सितंबर 2012 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के निर्णय का लाभ नहीं देना मनमाना है। सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के इस दृष्टिकोण से असहमत जताते हुए कहा कि, "क्या सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का निर्णय नोएडा द्वारा पारित प्रस्ताव पर वापस जाना चाहिए या राज्य सरकार द्वारा अनुमोदन की तारीख से प्रभावी किया जाना चाहिए, यह राज्य सरकार के लिए तय करने का मामला है। आखिरकार, हर कटौती को आकर्षित करने में कुछ कर्मचारी लाइन के एक तरफ खड़े होंगे जबकि अन्य अन्यथा दूरी ओर खड़े होंगे। कठिनाई का यह तत्व उच्च न्यायालय के लिए यह मानने का आधार नहीं हो सकता कि निर्णय मनमाना था। जब राज्य सरकार ने मूल रूप से 28 नवंबर 2001 को अपने स्वयं के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु अट्ठावन से साठ वर्ष तक बढ़ाने का फैसला किया, इसने सार्वजनिक क्षेत्र के निगमों को वित्तीय प्रभाव के आधार पर निर्णय लेने के लिए छोड़ दिया, जिसके परिणामस्वरूप यदि वे अपने स्वयं के कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ा सकते हैं।"
न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण एंड अन्य बनाम बी.डी. सिंघल एंड अन्य
15 जुलाई 2021
दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्तारनामें के जरिये संपत्ति रखने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की।
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें दिल्ली पुलिस को निर्देश देने का आग्रह किया गया था कि संपत्ति के मालिकाना हक के तौर पर पॉवर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) को स्वीकार नहीं करे।
चीफ जस्टिस डी. एन. पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच ने गुरुवार को वकील और याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि दिल्ली पुलिस घर-घर जाकर सर्वे करे?
याचिका दायर करने वाले वकील मनोहर लाल शर्मा ने कहा कि दिल्ली पुलिस को जब शिकायत मिलती है कि किसी व्यक्ति ने पॉवर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर संपत्ति रखी है तो उसे कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पॉवर ऑफ अटॉर्नी अवैध दस्तावेज है और अगर किसी व्यक्ति ने इसके आधार पर कोई संपत्ति रखी है तो उस पर भारतीय दंड संहिता और कालाधन कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने शर्मा से कहा कि वह या तो याचिका वापस ले लें अन्यथा उन पर वह जुर्माना लगाएगी। कोर्ट ने कहा कि हम नोटिस जारी करना नहीं चाहते हैं। हम वकील पर जुर्माना नहीं लगाना चाहते हैं। इसके बाद वकील ने याचिका वापस ले ली।
याचिका में कहा गया कि पॉवर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से बिक्री काला धन छुपाने और टैक्स से बचने के लिए होता है जो गंभीर अपराध है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जांच में उन्होंने पाया कि पॉवर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से बिचौलिए काफी संख्या में बेनामी संपत्ति खरीदते हैं और इसका इस्तेमाल वे किराये के व्यवसाय में करते हैं।
स्रोत- हिंदुस्तान
Thursday, July 15, 2021
दस्तावेज परीक्षण के दौरान तलब किये जाने चाहिये, परीक्षण हो जाने के उपरांत नहीं- सर्वोच्च न्यायालय
Coram: Justices AM Khanwilkar and Sanjiv Khanna
उत्तर प्रदेश में अब डीजे बजाने पर रोक नहीं लगेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया है।
सुनवाई के दौरान इस कारोबार से जुड़े लोगों की ओर से अधिवक्ता दुष्यंत पाराशर का कहना था कि डीजे ऑपरेटर विवाह समारोह, जन्मदिन पार्टी और खुशी के अन्य मौकों पर अपनी सेवाएं देकर अपना जीवन- यापन करते हैं। हाईकोर्ट के आदेश से उनकी आजीविका पर संकट पैदा हो गई है। याचिका में कहा गया है यह उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।
हस्तलेख परीक्षण के लिये मूल दस्तावेज आवश्यक - इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा दस्तावेज़ की केवल फोटो-कॉपी होने पर हस्ताक्षरों की फोरेंसिक अथवा हस्तलेखन विशेष...
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD Hon’ble Dr. Yogendra Kumar Srivastava, J. APPLICATION U/S 482 No. – 12300 of 2021 Yas Moha...
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आज प्रदेश के अधिवक्ताओं की समस्याओं को लेकर माननीय चेयरमैन बार काउंसिल श्री मधुसूदन त्रिपाठी जी के साथ माननीय मुख्यमंत्री महोदय ...
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सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करते हुए आर्य समाज द्वारा जारी एक विवाह प्रमाण पत्र को स्वीकार करने से इनकार ...