LAWMAN Times
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Monday, October 19, 2026
Matters remanded for fresh adjudication in the interest of substantial justice
क्रिमिनल प्रोसीजर - सेशन केस और कंप्लेंट केस को एक साथ करना / मिलाना - अलग ट्रायल का नियम है - जॉइंट ट्रायल अपनी मर्ज़ी से और तभी हो सकता है जब जुर्म एक ही ट्रांज़ैक्शन का हिस्सा हों या कानूनी शर्तें पूरी हों - जहाँ FIR केस और कंप्लेंट केस अलग-अलग घरों पर हुए हमलों से जुड़े हों, जिनमें अलग-अलग आरोपी/पीड़ित हों और एक सेशन ट्रायल के लायक हो जबकि दूसरा कंप्लेंट केस हो, तो एक साथ करना गलत माना गया। (सुप्रीम कोर्ट)
Sunday, October 18, 2026
CrPC की धारा 125(3) के तहत मेंटेनेंस ऑर्डर का पालन न करने पर ज़्यादा से ज़्यादा एक महीने की जेल हो सकती है; ट्रायल कोर्ट पति को लगातार जेल में नहीं रख सकता: झारखंड हाई कोर्ट
Saturday, October 17, 2026
नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा - पिता की मृत्यु के बाद माता एकमात्र प्राकृतिक अभिभावक - अन्य रिश्तेदारों पर अभिरक्षा का अधिकार
Friday, October 16, 2026
भरण-पोषण निष्पादन वाद 6 माह में नहीं निपटाना अवमानना, इलाहाबाद HC का UP के सभी फैमिली कोर्ट को महत्वपूर्ण निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी के सभी फैमिली कोर्ट को भरण-पोषण निष्पादन वाद छह माह में निपटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा न करने पर इसे सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय की अवमानना माना जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि सभी ट्रायल कोर्ट सुप्रीम कोर्ट और महानिबंधक के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें
परिवार न्यायालय कासगंज के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका हाई कोर्ट में खारिज।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के सभी परिवार न्यायालयों (फैमिली कोर्ट) को निर्देश दिया है कि वह भरण-पोषण के निष्पादन वादों का निपटारा छह महीने के भीतर हर हाल में करें। कोर्ट के अनुसार ऐसा नहीं करना सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय की अवमानना माना जाएगा। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने कासगंज निवासी दाता राम की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए यह अहम निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने पेरियाम्मल बनाम वी. राजामणि (2025) और राहुल एस. शाह बनाम जिनेंद्र कुमार गांधी (2021) मामले में स्पष्ट किया है कि निष्पादन याचिकाएं दाखिल होने से छह माह में निपटाई जाएं। शीर्ष अदालत ने विलंब पर चिंता जताई थी। इसके अनुपालन में हाई कोर्ट के महानिबंधक ने 24 मई 2025 को परिपत्र जारी किया। इसके तहत सभी जिला जज, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय, कमर्शियल कोर्ट, मोटर दावा दुर्घटना अधिकरण (एमएसीटी), भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण (एलएआरआरए) के पीठासीन अधिकारियों को चेताया था कि छह माह में निष्पादन न होने पर संबंधित अधिकारी हाई कोर्ट के प्रशासनिक पक्ष के प्रति जवाबदेह होंगे।
Saturday, October 3, 2026
Transfer of Petition-- Matrimonial Suit -- Wife Living Far Away with Minor Child -- Suit transferred to court near residence of wife
मां के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं की जा सकती बालिग बेटी : इलाहाबाद हाई कोर्ट
Matters remanded for fresh adjudication in the interest of substantial justice
Income Tax - Ex parte dismissal of appeals by CIT(A) confirming large additions/estimated profit without proper examination of assessee'...
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जनहित याचिका या पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) भारत में एक अनोखा कानूनी तरीका है जो किसी भी नागरिक या संगठन को उन लोगों की ओर से...
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में निजी संपत्ति के भीतर धार्मिक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए किसी तरह की अनुमति...
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने यह माना है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 90 के तहत तीस वर्ष पुराने दस्तावेजों को प्राप्त वै...