LAWMAN Times
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Monday, August 31, 2026
केवल धनराशि मिलना ही रिश्वत लेने आधार नहीं माना जा सकता- सुप्रीम कोर्ट
Monday, August 24, 2026
फुटपाथों को कब्जा मुक्त कराने के लिये निर्देश जारी
Tuesday, August 4, 2026
हस्तलेख परीक्षण के लिये मूल दस्तावेज आवश्यक - इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा दस्तावेज़ की केवल फोटो-कॉपी होने पर हस्ताक्षरों की फोरेंसिक अथवा हस्तलेखन विशेषज्ञ जांच नहीं कराई जा सकती है। दस्तावेज़ की केवल फोटो-कॉपी होने पर हस्ताक्षरों की फोरेंसिक अथवा हस्तलेखन विशेषज्ञ जांच नहीं कराई जा सकती क्योंकि फोटोकॉपी में लिखावट का दबाव और स्याही का प्रवाह गायब हो जाता है, जिससे वैज्ञानिक राय देना असंभव है। एटा (उत्तर प्रदेश) में एक दुकान से किरायेदार की बेदखली की कार्यवाही चल रही थी।
किरायेदार ने अपने बचाव में वर्ष 2005 के किरायानामे की फोटो-कॉपी पेश की और कहा कि मूल प्रति मकान मालिक के पास है। उसने कोर्ट से गुहार लगाई कि फोटो-कॉपी पर मौजूद मकान मालिक के कथित हस्ताक्षरों की जांच हस्तलेखन विशेषज्ञ से कराई जाए।
किराया प्राधिकरण और किराया अधिकरण दोनों ने इस अर्ज़ी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मूल दस्तावेज़ के बिना केवल फोटो-कॉपी पर फोरेंसिक जांच का कोई कानूनी औचित्य नहीं है। इसके खिलाफ किरायेदार हाईकोर्ट पहुँचा। न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने याचिका खारिज करते हुए मुख्य कानूनी व वैज्ञानिक सिद्धांत देते हुए कहा कि फोटोकॉपी में वैज्ञानिक गुणों का अभाव रहता है। कोर्ट ने आगे कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ केवल अक्षरों का बाहरी आकार नहीं देखता, बल्कि लिखावट की गति, दबाव स्याही का प्रवाह और कलम उठाने के तरीके की जांच करता है। फोटोकॉपी में धुंधलापन, विकृति, छाया और दबाव गायब हो जाते हैं। कोर्ट ने किरायेदार की इस दलील को खारिज कर दिया कि मकान मालिक के बयान/स्वीकारोक्ति के आधार पर जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्वीकारोक्ति इस मूल आवश्यकता को खत्म नहीं कर सकती कि फोरेंसिक जांच के लिए भेजी जाने वाली सामग्री विश्वसनीय वैज्ञानिक परीक्षण के योग्य हो। हाईकोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता मूल दस्तावेज़ न होने पर अन्य स्वीकार्य साक्ष्यों जैसे किराया रसीदें या मौखिक गवाही के आधार पर अपना पक्ष साबित करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन फोटोकॉपी को विशेषज्ञ जांच के लिए नहीं भेजा जा सकता।
Sunday, August 2, 2026
पत्नी के गैर वैवाहिक सबन्ध होने पर गुजारा भत्ता नहीं- सुप्रीम कोर्ट
Saturday, July 25, 2026
मेंटेनेंस ऑर्डर लागू न करने पर कंटेम्प्ट प्रोसीडिंग्स हो सकती हैं: HC ने फैमिली कोर्ट के जजों को चेतावनी दी
Friday, July 17, 2026
फर्जी हस्ताक्षर करने के लिए याची एवं उसके अधिवक्ता के विरुद्ध कार्यवाही
Monday, July 13, 2026
चार्ज शीट दाखिल होने पर प्रोटेस्ट दाखिल नहीं किया जा सकता - मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Thursday, July 9, 2026
तलाक के बाद पुनर्विवाह कर लेने पर पूर्व पति से गुजारा भत्ता क्यों - इलाहाबाद हाई कोर्ट
Monday, July 6, 2026
मोरमुगाओ पोर्ट से शिवाजी की प्रतिमा हटाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया
Tuesday, June 23, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस द्वारा व्यक्ति को हिरासत में रखने पर 10 लाख रुपये अदा करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच, हाई कोर्ट द्वारा रेस्पोंडेंट को दिए गए मुआवजे की रकम के सीमित मुद्दे पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य की अपील पर सुनवाई कर रही थी।
राज्य ने मुआवजे की रकम के खिलाफ दलील दी, साथ ही रेस्पोंडेंट को गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने को भी माना। इसने कोर्ट को बताया कि संबंधित स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जिन्हें तब से सस्पेंड कर दिया गया है।
राज्य के वकील की दलील के बाद, बेंच ने रेस्पोंडेंट को मुआवजे के भुगतान के संबंध में एक नोटिस जारी किया और अंतरिम रोक का आदेश दिया। अदालत ने कहा, "नोटिस जारी करें। इस बीच, जहां तक याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने से संबंधित आदेश है, उस पर अगली सुनवाई तक रोक लगी रहेगी।"
केवल धनराशि मिलना ही रिश्वत लेने आधार नहीं माना जा सकता- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि यदि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग...
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD Hon’ble Dr. Yogendra Kumar Srivastava, J. APPLICATION U/S 482 No. – 12300 of 2021 Yas Moha...
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जनहित याचिका या पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) भारत में एक अनोखा कानूनी तरीका है जो किसी भी नागरिक या संगठन को उन लोगों की ओर से...
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में निजी संपत्ति के भीतर धार्मिक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए किसी तरह की अनुमति...