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Friday, June 19, 2026

युवा और प्रतिभाशाली वकील आर्थिक तंगी से पेशा छोड़ रहे हैं, अदालत परिसर में महिला वकीलों की सुरक्षा व आराम के लिए आग्रह किया सुप्रीम कोर्ट ने

 सुप्रीम कोर्ट ने "युवा वकीलों के पेशेवर सहायता कोष" की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया ताकि इस पेशे से "ब्रेन ड्रेन" को रोका जा सके। सर्वोच्च अदालत का कहना है कि युवा और प्रतिभाशाली वकील वित्तीय कठिनाइयों के कारण पेशे को छोड़ रहे हैं। अपर न्यायालय ने महिला वकीलों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं पर भी ध्यान दिया और कहा कि जब उन्हें अपने दिन का बड़ा हिस्सा अदालत परिसर में बिताना पड़ता है, तो उनके आराम, गोपनीयता, सुरक्षा और पेशेवर कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। अदालत ने सभी पक्षों से इन विषयों पर गंभीरता से अपनी राय देने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया, जिसमें युवा वकीलों द्वारा पेशे के प्रारंभिक वर्षों में सामना की जाने वाली वित्तीय चुनौतियों पर याचिका के जवाब मांगे गए। महिला वकीलों के एक समूह द्वारा दायर याचिका ने कानूनी पेशे में महिला वकीलों की पहुंच, समावेशिता और दीर्घकालिक स्थिरता के मुद्दों को भी उठाया और कहा- युवा और प्रतिभाशाली वकील आर्थिक तंगी से पेशा छोड़ रहे हैं।
पीठ ने कहा कि युवा वकीलों द्वारा सामना की जाने वाली वित्तीय चुनौतियां पुरुषों व महिलाओं दोनों को ही समान रूप से हैं और इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। इस प्रारंभिक अवधि में कई जूनियर वकील अपने सीनियर्स द्वारा दिए गए मामूली भत्तों पर निर्भर रहते हैं, जो अक्सर उनके बुनियादी जीवन व्यय को पूरा करने के लिए अपर्याप्त होते हैं। न्यायालय ने कहा कि इन वर्षों में सीमित पारिश्रमिक अत्यधिक वित्तीय कठिनाई पैदा करता है। इस प्रकार की कमी पेशेवर ब्रेन ड्रेन का रूप ले सकती है, जो बार के युवा और योग्य वकीलों को आकर्षित करने और बनाए रखने की क्षमता को कम करती है।" पीठ ने कहा, "युवा वकीलों का 'पेशेवर सहायता कोष' स्थापित किया जाना चाहिए।

Tuesday, December 2, 2025

अधिवक्ता से दुर्व्यवहार करना पुलिस को भारी पड़ा

जोधपुर
अधिवक्ता से दुर्व्यवहार करने पर SHO सस्पेंड, एक साथ पूरा थाना लाइन हाज़िर, सभी को पुनः ट्रेनिंग देने का कोर्ट ने दिया आदेश।
अधिवक्ता से दुर्व्यवहार केस में हाईकोर्ट का कड़ा रुख सामने आया है। वीडियो देखने के बाद कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को फटकार लगाते हुए SHO को तुरंत सस्पेंड करने और पूरे मामले की जांच IPS रैंक के अधिकारी से कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी पुलिसकर्मियों को सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग दी जाए ताकि जनता से कैसे बात करनी है यह समझ सकें। कमिश्नर ने कोर्ट में बताया कि SHO के साथ अन्य दोषियों को भी थाने से हटाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने एक सप्ताह में पूरी जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

Friday, November 28, 2025

उपनिरीक्षक एवं सिपाही निलम्बित


 मुरादाबाद
आज दिनांक 28.11.2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुरादाबाद द्वारा निम्न पुलिस कर्मियों—
1. उप निरीक्षक (ना०पु०) सुरेन्द्र सिंह तैनाती– कस्बा प्रभारी, थाना ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद।
2. आरक्षी (ना०पु०) रजत बालियान थाना ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद को पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने, पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता एवं अकर्मण्यता बरतने के गंभीर आरोपों के परिप्रेक्ष्य में उ०प्र० अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दण्ड एवं अपील) नियमावली–1991 के नियम 17(1)(A) के अंतर्गत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुरादाबाद द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

Monday, October 27, 2025

स्थानीय बार एसोसिएशन के चुनाव कराने पर BCI की रोक


बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को 15 नवंबर, 2025 से 15 फरवरी, 2026 के बीच राज्य में जिला और स्थानीय बार एसोसिएशनों के सभी चुनावों को रोकने का निर्देश दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य उस अवधि के दौरान निर्धारित उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनावों के सुचारू और व्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करना है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव श्रीमंतो सेन के हस्ताक्षर से जारी 25 अक्टूबर, 2025 के एक आधिकारिक पत्र में, बीसीआई ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को निर्देश दिया कि वह राज्य भर के सभी बार एसोसिएशनों को सूचित करे कि वे निर्दिष्ट तीन महीने की अवधि के दौरान कोई चुनाव न कराएं या अधिसूचित न करें।

Saturday, July 19, 2025

संपत्ति सुरक्षा के लिए अस्थाई निषेधाज्ञा एक सिविल उपचार-अधिवक्ता परिषद ब्रज का स्वाध्याय मंडल आयोजित

अधिवक्ता परिषद ब्रज जनपद इकाई सम्भल के स्वाध्याय मंडल की बैठक दिनांक 19/07/2025 एडवोकेट अजीत सिंह स्मृति भवन बार रूम सभागार चंदौसी में आयोजित की गई,  जिसमें जिला कार्यकारणी अधिवक्ता परिषद बृज का विस्तार करते हुए सचिन शर्मा को मंत्री नियुक्त किया गया साथ ही चंदौसी बार एसोसियशन  के वरिष्ठ उपाध्यक्ष  पद पर निर्विरोध चुने जाने पर विपिन कुमार सिंह राघव का पटका पहना कर स्वागत किया,  उसके बाद मुख्य वक्ता दीपक राठौर एडवोकेट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत आदेश 39 अस्थाई व्यादेश मामलों पर बताया कि किन परिस्थितियों में अस्थाई व्यादेश आदेश 39  के वाद न्यायालय में लाये जा सकते हैं आदेश 39, सिविल प्रक्रिया संहिता सीपीसी में अस्थायी निषेधाज्ञा और अंतरिम आदेशों से संबंधित है। इसका मुख्य उद्देश्य मुकदमे के लंबित रहने के दौरान संपत्ति को नुकसान या दुरुपयोग होने से बचाना है। यह आदेश न्यायालय को यह सुनिश्चित करने का अधिकार देता है कि संपत्ति को नष्ट या स्थानांतरित न किया जाए, और यह सुनिश्चित करता है कि वादी को उसके अधिकारों से वंचित न किया जाए।
अस्थायी निषेधाज्ञा अदालत का आदेश है जो किसी पक्ष को किसी विशेष कार्य को करने से रोकता है, या किसी विशेष कार्य को करने के लिए बाध्य करता है, जब तक कि मुकदमे का निपटारा नहीं हो जाता। 

अंतरिम आदेश के ये आदेश मुकदमे के दौरान जारी किए जाते हैं ताकि संपत्ति की रक्षा की जा सके या वादी के अधिकारों को सुरक्षित किया जा सके। 
इसके अंतर्गत नियम 1 और 2  उन स्थितियों को बताते हैं  जिनमें अस्थायी निषेधाज्ञा जारी की जा सकती है। 
नियम 2ए उन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करता है जो अदालत द्वारा जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हैं, जिसमें सिविल कारावास और संपत्ति की कुर्की शामिल हो सकती है। 
नियम 3 यह बताता है कि एकपक्षीय निषेधाज्ञा जारी होने पर विरोधी पक्ष को 24 घंटे के भीतर इसकी सूचना दी जानी चाहिए। 
नियम 4 यह बताता है कि निषेधाज्ञा आदेश को कब रद्द या परिवर्तित किया जा सकता है। 
संक्षेप में, आदेश 39 सीपीसी मुकदमे के दौरान संपत्ति की सुरक्षा और वादी के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इस प्रकार, अस्थायी निषेधाज्ञा देने से पहले कुछ शर्तों को पूरा करना आवश्यक है जैसे कि प्रथम दृष्टया मामला वादी के पक्ष में और प्रतिवादी के खिलाफ है.
वादी को अपूरणीय क्षति होने की संभावना है, जिसकी भरपाई धन के रूप में नहीं की जा सकती है
सुविधा का संतुलन  वादी के पक्ष में है और प्रतिवादी के विरुद्ध है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव शर्मा तथा संचालन विकास कुमार मिश्रा ने किया। 
कार्यक्रम मे विष्णु शर्मा, राहुल चौधरी, प्रवीण गुप्ता, विभोर बंसल, रमेश सिंह राघव, चंद्र शेखर, शबाब आलम, कुणाल, शुभम प्रताप सिंह, रजनी शर्मा, अमरीश कुमार, राहुल रस्तौगी, श्यामेन्द्र सिंह, सचिन शर्मा, सुनील कुमार सिंह, अजय कुमार, मोक्षिका शर्मा, आशीष अग्रवाल, नरेश कुमार, विपिन कुमार सिंह राघव, यशपाल सिंह राणा, नवीन कोहली आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।

Thursday, July 3, 2025

सम्भल हरिहर मंदिर विवाद में अगली सुनवाई 21 जुलाई को


संभल हरिहर मंदिर विवाद में बड़ी पक्ष के अधिवक्ता श्री गोपाल शर्मा द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय दिनांक 19 मार्च 2025 के आदेश की प्रति सिविल जज आदित्य कुमार सिंह के न्यायालय में प्रस्तुत की गई जिसका माध्यम से बताया गया कि हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद कमेटी द्वारा योजित याचिका निरस्त कर दी गयी है जिसमे हाईकोर्ट ने दिनांक 19 नवम्बर 2024 को सिविल जज सीनियर डिवीजन सम्भल द्वारा दिए गए सर्वे कमीशन के आदेश को सही ठहराते हुए निचली अदालत में लगी सुनवाई पर लगी रोक हटा दी है।

ए एस आई और भारत सरकार के अधिवक्ता विष्णु कुमार शर्मा ने बताया कि प्रतिवादी संख्या 2, 3 व 4  की ओर से पूर्व में ही जबाब दावा प्रस्तुत किया जा चुका है और हाई कोर्ट से भी सुनवाई पर लगी रोक हटा दी गयी है। ऐसी स्तिथि में वाद की कार्यवाही प्रारंभ  हो जानी चाहिये। सिमरन गुप्ता द्वारा उपरोक्त वाद में पक्षकार बनाये जाने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसकी प्रति वादी प्रतिवादी पक्षकार को उपलब्ध कराए जाने को न्यायालय ने कहा। अग्रिम कार्यवाही के न्यायालय द्वारा दिनांक 21/07/2025 नियत की गई है।

Friday, June 6, 2025

बच्चों को वर्चुअल दुनिया से दूर रखें - प्रभाष चंद्र चौधरी

संवाद चंदौसी
भारत विकास परिषद नव उदय शाखा चंदौसी द्वारा पांचदिवसीय बाल संस्कार शाला का पंडित गोबिंद बल्लभ पंत उच्च प्राथमिक विद्यालय चंदौसी में आयोजन किया गया था जिसमें बच्चों को योगासन, व्यायाम, नृत्य, गायन, मेंहदी लगाना तथा पेपर क्राफ्ट के माध्यम से विभिन्न वस्तुओं को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। समापन के अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रभाष चंद्र चौधरी ने कहा आज बच्चे वर्चुअल दुनिया में जी रहे हैं और संस्कृति और भारतीयता से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित संस्कार शाला का उद्देश्य बच्चों में संस्कार प्रदान करना और भारतीयता की भावना जागृत करना है और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमारी शाखा ने यह शिविर आयोजित किया। अध्यक्ष विकास गोयल ने विद्यालय के प्रधानाचार्य आशुतोष गुप्ता अध्यापक नीतू रानी व शहनाज अंसारी का उनके विशेष सहयोग के लिए उनका विशेष आभार प्रकट किया। समापन कार्यक्रम में नितिन गुप्ता, अतुल शंकर चौधरी, सुनीता शर्मा, कल्पना गुप्ता, मोहित गोयल, मधुर वार्ष्णेय, एडवोकेट विष्णु शर्मा, अंकुर गोयल व अजय शर्मा उपस्थित रहे।

Thursday, March 27, 2025

संभल जिला न्यायालय ने शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली को अग्रिम जमानत देने से इंकार

संभल जामा मस्जिद के सदर को नहीं मिली जमानत

संभल जिला न्यायालय ने शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। पिछले रविवार को जफर अली का रिमांड सिविल  जज सीनियर डिवीजन संभल के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था रिमांड के समय प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रिमांड स्वीकार करके जफर अली को जेल भेज दिया जफर अली पर हिंसा भड़काने जैसा गंभीर आरोप है। इसके उपरांत  सोमवार को जफर अली द्वारा उनके अधिवक्ताओं के माध्यम से जिला जज संभल के न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। जिला जज संभल द्वारा जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई हेतु श्री निर्भय नारायण राय अपर जिला जज के न्यायालय में अंतरित कर दिया गया जिस पर सुनवाई करते हुए अपर जिला जज ने जमानत प्रार्थना पत्र पर 27 मार्च 2025 तिथि नियत की थी । दिनांक 27 मार्च 2025 को संबंधित केस की केस डायरी न आ पाने के कारण जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई हेतु दिनांक 2 अप्रैल की तिथि नियत कर दी गई है। इसके साथ ही 27 मार्च को ही जफर अली के अधिवक्ताओं द्वारा अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया गया था जिस पर सुनवाई करते हुए अपर जिला जज ने आरोपित के अधिवक्ताओं और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी की बहस सुनकर अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया और स्थाई जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई हेतु दिनांक 2 अप्रैल तिथि नियत कर दी गई है।

हस्तलेख परीक्षण के लिये मूल दस्तावेज आवश्यक - इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा दस्तावेज़ की केवल फोटो-कॉपी होने पर हस्ताक्षरों की फोरेंसिक अथवा हस्तलेखन विशेष...