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Tuesday, February 3, 2026
निजी संपत्ति में धार्मिक आयोजन को अनुमति की आवश्यकता नहीं
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने POCSO अधिनियम के अंतर्गत की गयी कार्यवाही रदद् की, संबंधित न्यायिक अधिकारी व अभियोजक को कारण बताओ नोटिस किया जारी
Monday, February 2, 2026
नेशनल चर्च काउंसिल ने 12 राज्यो के मतांतरण कानून के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की
नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज़ ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें बारह राज्यों - ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान - द्वारा बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले को धार्मिक धर्मांतरण कानूनों से संबंधित अन्य समान याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। इन याचिकाओं पर तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी
Sunday, February 1, 2026
जनहित याचिका
जनहित याचिका या पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) भारत में एक अनोखा कानूनी तरीका है जो किसी भी नागरिक या संगठन को उन लोगों की ओर से न्याय मांगने के लिए अदालतों में जाने की अनुमति देता है जो अक्सर गरीबी, अज्ञानता या सामाजिक नुकसान के कारण ऐसा नहीं कर सकते ।
1970 के दशक के आखिर और 1980 के दशक की शुरुआत में, मुख्य रूप से जस्टिस पी.एन. भगवती और जस्टिस वी.आर. कृष्णा अय्यर के प्रयासों से इसे पेश किया गया था, इसने लोकस स्टैंडी के पारंपरिक नियम (जो आमतौर पर केवल पीड़ित पक्ष को ही केस फाइल करने की अनुमति देता है) में ढील देकर भारतीय कानूनी परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया।
संवैधानिक आधार
PIL दोनों में से किसी न्यायालय में योजित की जा सकती है:
सुप्रीम कोर्ट: संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत।
हाई कोर्ट: संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत।
हालांकि PIL को किसी खास कानून में परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन वे कोर्ट की न्यायिक समीक्षा की शक्ति और संविधान के भाग III में दिए गए मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के उसके कर्तव्य का विस्तार हैं।
PIL कौन फाइल कर सकता है?
जनहितैषी नागरिक: कोई भी व्यक्ति जो जनता के भले के लिए नेक इरादे से काम कर रहा हो।
NGO और सामाजिक समूह: हाशिए पर पड़े समुदायों की ओर से काम करने वाले संगठन।
खुद कोर्ट (स्वतः संज्ञान): कोर्ट मीडिया रिपोर्टों या नागरिकों से मिले पत्रों के आधार पर खुद किसी मुद्दे पर संज्ञान ले सकता है।
स्मरण रहे- जनहित याचिका जनसमुदाय के लाभ के लिए फाइल की जानी चाहिए, न कि निजी फायदे, राजनीतिक मकसद या फालतू कारणों से (जिन्हें अक्सर कोर्ट "पर्सनल" या "पॉलिटिकल" इंटरेस्ट लिटिगेशन कहते हैं), कोर्ट ने यदि ऐसा पाया तो कोर्ट जुर्माना भी लगा देती है।
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Injunction - **Ex parte ad interim injunction** granted by the trial court - Found to be based on relevant materials and pleadings on oath -...
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