Wednesday, May 11, 2022

अगर आरोपी के खिलाफ बेईमानी का आरोप नहीं लगाया जाता है, धोखाधड़ी का मामला खारिज किया जा सकता है- सर्वोच्च न्यायालय


रेखा जैन बनाम कर्नाटक राज्य 

कोरम: जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्नमक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत अपराध के लिए व्यक्ति के खिलाफ मामला बनाने के लिए किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति देने के लिए धोखा और बेईमान का प्रलोभन होना चाहिए।

इस मामले में शिकायतकर्ता ने कमलेश मूलचंद जैन (रेखा जैन के पति) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उक्त कमलेश मूलचंद जैन ने अन्य बातों के साथ-साथ गलत बयानी, प्रलोभन और धोखा देने के इरादे से दो किलो और 27 ग्राम सोने के आभूषण ले लिए। इसके बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत अपराध के लिए एफआईआर दर्ज की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत अपराध के लिए व्यक्ति के खिलाफ मामला बनाने के लिए किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति देने के लिए धोखा और बेईमान का प्रलोभन होना चाहिए।

इस मामले में शिकायतकर्ता ने कमलेश मूलचंद जैन (रेखा जैन के पति) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उक्त कमलेश मूलचंद जैन ने अन्य बातों के साथ-साथ गलत बयानी, प्रलोभन और धोखा देने के इरादे से दो किलो और 27 ग्राम सोने के आभूषण ले लिए। इसके बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत अपराध के लिए एफआईआर दर्ज की गई।

जांच के दौरान, यह पाया गया कि आरोपी की पत्नी रेखा जैन फरार है और मूल शिकायतकर्ता से उसके पति कमलेश मूलचंद जैन द्वारा छीने गए सोने के आभूषण उसके पास हैं। इसलिए उसके खिलाफ भी जांच की गई। रेखा जैन ने आईपीसी की धारा 420 के तहत अपराध के लिए अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका के माध्यम से कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही/एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया और इस प्रकार उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रेखा जैन ने तर्क दिया कि जब उनके द्वारा प्रलोभन का कोई आरोप नहीं है तो यह नहीं कहा जा सकता कि उसने आईपीसी की धारा 420 के तहत कोई अपराध किया है। राज्य ने अपील का विरोध करते हुए कहा कि रेखा जैन के पास सोने के आभूषण हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता से छीन लिया गया था।

शिकायत और एफआईआर का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा कि सभी आरोप आरोपी कमलेश मूलचंद जैन के खिलाफ हैं। इस आशय का कोई आरोप नहीं है कि आरोपी रेखा जैन ने शिकायतकर्ता को सोने के आभूषण देने के लिए प्रेरित किया।

पीठ ने आगे कहा,

"आईपीसी की धारा 420 के अनुसार, जो कोई भी धोखा देता है और इस तरह बेईमानी से किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति देने के लिए प्रेरित करता है, उसे आईपीसी की धारा 420 के तहत अपराध कहा जा सकता है। इसलिए, व्यक्ति के खिलाफ मामला बनाने के लिए आईपीसी की धारा 420 के तहत अपराध किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को कोई संपत्ति देने के लिए किसी व्यक्ति को धोखा देने के लिए एक बेईमान प्रलोभन होना चाहिए। वर्तमान मामले में आईपीसी की धारा 420 के तहत कोई आरोप नहीं है। रेखा जैन पर किसी तरह का प्रलोभन का आरोप नहीं लगाया है। बेईमानी के प्रलोभन और धोखाधड़ी के आरोप उसके पति-आरोपी कमलेश मूलचंद जैन के खिलाफ हैं। इसलिए, एफआईआर/शिकायत में आरोपों को मानते हुए और बेईमानी के किसी भी आरोप के अभाव में यह नहीं कहा जा सकता है कि रेखा जैन ने आईपीसी की धारा 420 के तहत कोई अपराध किया है जिसके लिए अब उसके खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है।"

अपील की अनुमति देते हुए अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट को आईपीसी की धारा 420 के तहत अपराध के लिए रेखा जैन के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए था।

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