Monday, July 13, 2026

चार्ज शीट दाखिल होने पर प्रोटेस्ट दाखिल नहीं किया जा सकता - मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि जांच एजेंसी किसी मामले में आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल करती है, तो आरोपी को उसके खिलाफ विरोध याचिका (Protest Petition) दायर कर आरोप तय होने से पहले अलग से सुनवाई कराने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसी स्थिति में आरोपी के पास उपलब्ध कानूनी उपाय केवल आरोपमुक्ति (Discharge) की मांग करना है।

यह टिप्पणी उस मामले में की गई, जिसमें एक महिला ने आरोपी पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया, जबकि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर BNS की धारा 69 और धारा 296 के तहत आरोप तय किए।

आरोपी ने आरोपपत्र और संज्ञान आदेश को चुनौती देते हुए विरोध याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि उसके तर्क वास्तव में आरोपमुक्ति की मांग से जुड़े थे। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किया जाना इस बात का संकेत है कि आरोपमुक्ति की मांग अस्वीकार कर दी गई थी। साथ ही, विरोध याचिका पर अलग से आदेश न देने मात्र से पूरी कार्यवाही अवैध नहीं हो जाती।
वाद शीर्षक: पार्थ कुमार तिवारी बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (Cr.R. No. 2569/2026)

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