मामले के अनुसार, 30 जुलाई 2025 को झांसी फैमिली कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच तलाक की डिक्री पारित की थी। इसके लगभग एक महीने बाद पत्नी ने दूसरा विवाह कर लिया। पति का दावा है कि पत्नी ने अपने शपथपत्र में स्वयं पुनर्विवाह की जानकारी दी थी और CrPC की धारा 125 के तहत चल रही गुजारा भत्ता की कार्यवाही में उसने इस संबंध में आपत्ति भी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने पत्नी के लिए ₹10,000 प्रतिमाह और पुत्र के लिए ₹5,000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश पारित कर दिया।
इस आदेश को चुनौती देते हुए पति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया और कहा कि वह अपने पुत्र के भरण-पोषण की राशि देने को तैयार है तथा उसका भुगतान भी कर रहा है, लेकिन पुनर्विवाह कर चुकी पत्नी को पहले पति से गुजारा भत्ता देने का आदेश कानून के अनुरूप नहीं है। उल्लेखनीय है कि CrPC की धारा 125 के अनुसार, तलाकशुदा महिला तभी गुजारा भत्ता पाने की पात्र होती है, जब तक उसने दूसरा विवाह न किया हो।
सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी ने फैमिली कोर्ट के जज श्री हरिशचंद्र से स्पष्टीकरण मांगा है और मामले में पत्नी को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 जुलाई तय की है।
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