Sunday, June 4, 2023

राम जन्मभूमि के फैसले में देरी के लिए मुझ पर दबाव था- न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल

जस्टिस सुधीर अग्रवाल जी  23 अप्रैल, 2020 को हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुए। वर्त्तमान में वे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में सेवारत हैं।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक कार्यक्रम के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “फैसला सुनाने के बाद… मैं धन्य महसूस कर रहा हूं…।” मुझ पर केस का फैसला टालने का दबाव था। घर के अंदर और बाहर दोनों जगह दबाव था।” उन्होंने कहा, “परिवार के सदस्य और रिश्तेदार सलाह देते थे कि हम किसी तरह टाइम पास करें और फैसला न सुनाएं।”

उन्होंने कहा, “अगर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में 30 सितंबर, 2010 को फैसला नहीं सुनाया गया होता, तो अगले 200 सालों तक इस मामले में कोई फैसला नहीं होता।”

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर, 2010 को 2:1 बहुमत के फैसले के साथ अपना निर्णय जारी किया, जिसमें कहा गया था कि अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षों के बीच समान रूप से विभाजित किया जाएगा: सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और ‘राम’ लल्ला, हिंदू महासभा द्वारा प्रतिनिधित्व किया।

बेंच में जस्टिस एस यू खान, सुधीर अग्रवाल और डी वी शर्मा बैठे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में फैसला सुनाया कि अयोध्या में विवादित भूमि पर एक मंदिर बनाया जाएगा और सरकार को मुस्लिम पक्षकारों को वैकल्पिक पांच एकड़ का भूखंड देने का आदेश दिया।

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