Saturday, July 24, 2021

जज साहब के फर्जी हस्ताक्षर से दोनों आरोपियों को नवंबर 2020 में रिहा कराया गया। मामला जुलाई में खुला। इसके बाद आरोपी लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

उत्तर प्रदेश के एटा की जिला जेल में निरुद्ध दो बंदियों को न्यायाधीश के फर्जी हस्ताक्षर से जमानत पर रिहा करा लिया गया। पॉक्सो एक्ट के इन आरोपियों को रिहा कराने के लिए न्यायालय के ही एक लिपिक ने फर्जी आदेश बनाए। मामला संज्ञान में आने पर जिला जज ने जांच कराई तो लिपिक दोषी पाया गया। लिपिक के खिलाफ कोतवाली नगर में दो रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

जनपद न्यायाधीश मृदुलेश कुमार सिंह के आदेश और अपर जिला जज कैलाश कुमार की जांच रिपोर्ट आने के बाद पेशकार अज्ञान विजय की ओर से तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें आरोप है कि न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो-प्रथम में तैनात लिपिक मनोज कुमार ने न्यायाधीश कुमार गौरव के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर जेल में निरुद्ध आरोपी उमेश कुमार निवासी लोधई (हाथरस) को सात नवंबर 2020 को रिहा कराया। 

आरोपियों के खिलाफ इन आरोपों में दर्ज है मुकदमा 
उमेश पर एक किशोरी के अपहरण, पॉक्सो और एससी-एसटी के तहत रिपोर्ट दर्ज है। दूसरा मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायालय रेप व पॉक्सो प्रथम के पेशकार नवरतन सिंह ने लिपिक मनोज कुमार के खिलाफ दर्ज कराया है। इसमें विकास बघेल निवासी बारथर थाना कोतवाली देहात को नौ दिसंबर 2020 को फर्जी हस्ताक्षरों से आदेश तैयार कर रिहा कराने का आरोप है। विकास बघेल पर दुष्कर्म के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज है। 
सूत्र अमर उजाला

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