Monday, June 10, 2024

यूपी सिविल जज परीक्षा में कथित छेड़छाड़ के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, जो हजारों न्यायिक उम्मीदवारों को प्रभावित कर सकता है, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) को 2022 यूपी न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मुख्य परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं के साथ कथित छेड़छाड़ की जांच करने का आदेश दिया है।

यह जांच श्रवण पांडे नामक अभ्यर्थी की याचिका के बाद शुरू की गई, जिसने तर्क दिया कि अंग्रेजी और हिंदी के पेपर की उसकी उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ की गई थी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान पांडे के आरोप सामने आए।

मामला तब शुरू हुआ जब पांडे अगस्त 2023 में प्रकाशित अपने परीक्षा परिणामों से असंतुष्ट थे, उन्होंने अंकन योजना की जांच करने के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम का उपयोग किया। 25 मई को अपनी उत्तर पुस्तिकाएँ देखने के बाद उनका संदेह और गहरा हो गया, जहाँ उन्होंने अपने हिंदी पेपर में लिखावट में स्पष्ट विसंगतियाँ और उत्तरों में बेवजह अंक काटे जाने को देखा।

यूपीपीएससी द्वारा न्यायालय द्वारा पहले दिए गए निर्देश के अनुसार उत्तर पुस्तिकाएं प्रस्तुत करने में विफल रहने के बावजूद, आयोग के वकील, एडवोकेट निशीथ यादव ने पीठ को न्यायिक परीक्षा की सभी 18,000 उत्तर पुस्तिकाओं की व्यापक जांच के बारे में सूचित किया। यह कदम पांडे की याचिका के बाद उठाया गया जिसमें उनके अंकों और लिखावट में विसंगतियों को उजागर किया गया था।
कोर्ट ने अब यूपीपीएससी को 1 जुलाई तक जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने और अगली सुनवाई में पांडे की विशिष्ट उत्तर पुस्तिकाएं पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने अगले आदेश तक सभी परीक्षा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सख्त चेतावनी भी दी है।



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