Saturday, December 16, 2023

सिविल ट्रायल में क्रॉस एक्जामिनेशन के दौरान मुकदमे के पक्ष या गवाह का सामना करने के लिए दस्तावेज पेश किए जा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले के किसी पक्ष या गवाह का सामना करने के लिए सिविल ट्रायल में क्रॉस एक्जामिनेशन के दौरान दस्तावेज पेश किया जा सकता है। न्यायालय ने यह भी माना कि इस संबंध में मुकदमे के पक्षकार और गवाह के बीच कोई अंतर नहीं है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया कि दस्तावेजों को सीधे क्रॉस एक्जामिनेशन के चरण में केवल एक गवाह का सामना करने के लिए पेश किया जा सकता है, जो मुकदमे में पक्षकार नहीं है। दूसरे शब्दों में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि गवाह के रूप में गवाही देते समय वादी या प्रतिवादी को क्रॉस एक्जामिनेशन के दौरान किसी नए दस्तावेज़ के साथ सामना नहीं कराया जा सकता। हाईकोर्ट के दृष्टिकोण को अस्थिर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस संदर्भ में किसी मुकदमे के पक्षकार और गवाह के बीच कोई अंतर नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने एक संदर्भ का जवाब देते हुए कहा विरोधाभासी निर्णयों के आधार पर कहा गया: "आदेश VII, नियम 14(4) के तहत आदेश VIII, नियम 1-ए(4) और आदेश XIII, सिविल प्रक्रिया संहिता का नियम 3 न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना किसी गवाह (जो मुकदमे का पक्षकार नहीं है) से क्रॉस एक्जामिनेशन के चरण में उसकी याददाश्त को ताज़ा करने के लिए गवाह का सामना करने के लिए दस्तावेज़ सीधे प्रस्तुत किए जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि मुकदमे के एक पक्ष (वादी/प्रतिवादी) की तुलना एक गवाह से नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील में सुप्रीम कोर्ट ने दो मुद्दों पर विचार किया: क) क्या सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत किसी ट्रायल के पक्षकार और मुकदमे के गवाह के बीच अंतर की परिकल्पना की गई है? दूसरे शब्दों में, क्या वादी/प्रतिवादी का गवाह वाक्यांश स्वयं वादी या प्रतिवादी को बाहर कर देता है, जब वे अपने मामले में गवाह के रूप में उपस्थित होते हैं? बी) क्या, कानून के तहत और अधिक विशेष रूप से आदेश VII नियम 14; आदेश VIII नियम 1-ए; आदेश XIII नियम 1 आदि, वादी/प्रतिवादी के गवाह या दूसरे पक्ष के गवाह वाक्यांश के उपयोग के आधार पर किसी मुकदमे के पक्ष से क्रॉस एक्जामिनेशन करने वाले पक्ष को उसके प्रयोजनों के लिए दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का आदेश देता है, प्रतिवादी से क्रॉस एक्जामिनेशन करते समय?

मुकदमे के पक्षकार और गवाह के बीच कोई अंतर नहीं जस्टिस करोल द्वारा लिखित फैसले में कहा गया कि हाईकोर्ट का दृष्टिकोण गलत है। यहां तक कि वादी या प्रतिवादी भी अपने स्वयं के कारणों की गवाही देते समय गवाहों के संबंध में समान प्रक्रियाओं के अधीन होते हैं। इसलिए एक सख्त भेदभाव की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "मुकदमे के गवाह और पक्ष साक्ष्य जोड़ने के प्रयोजनों के लिए चाहे दस्तावेजी हों या मौखिक एक ही स्तर पर हैं।"
अदालत ने समझाया, "हमारे विचार में यह अंतर ठोस आधार पर नहीं टिकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि गवाह बॉक्स में गवाह या ट्रायल के पक्ष द्वारा किया गया कार्य समान होता है।" अदालत ने कहा, संहिता और साक्ष्य अधिनियम के प्रावधान गवाह के रूप में कार्य करने वाले मुकदमे के पक्ष और अन्यथा ऐसे पक्ष द्वारा गवाही देने के लिए बुलाए गए गवाह के बीच अंतर नहीं करते हैं। जैसा कि हमारी पिछली चर्चा से स्पष्ट हो चुका है, मुकदमे के पक्षकार और गवाह के बीच अंतर कुछ ऐसा नहीं है जो कानून से मेल खाता हो। [निर्णय के पैरा 17, 20]।

गवाह या मुकदमा करने वाले पक्ष का सामना करने के लिए क्रॉस एक्जामिनेशन में दस्तावेज़ पेश किए जा सकते हैं न्यायालय ने पैराग्राफ 26 में इस मुद्दे को इस प्रकार समाप्त किया: "दो उद्देश्यों में से किसी एक के लिए दस्तावेज़ पेश करने की स्वतंत्रता, यानी गवाहों से क्रॉस एक्जामिनेशन और/या याददाश्त को ताज़ा करना ट्रायल के पक्षकारों के लिए भी अपने उद्देश्यों को पूरा करेगा। इसके अतिरिक्त, किसी भी पक्ष से प्रभावी ढंग से प्रश्न पूछने और उत्तर प्राप्त करने से रोका जा सकता है। किसी ट्रायल में, इन दस्तावेज़ों की सहायता से दूसरे पक्ष को अपने दावे की पूर्ण सत्यता को सामने न रख पाने का ख़तरा होगा- जिससे उक्त कार्यवाही घातक रूप से समझौता हो जाएगी। इसलिए प्रस्ताव यह है कि कानून एक पक्ष के बीच अंतर करता है, साक्ष्य के प्रयोजनों के लिए ट्रायल और गवाह को नकार दिया गया है।" सिविल मुकदमे के क्रॉस एक्जामिनेशन वाले हिस्से को छोड़कर किसी भी अन्य बिंदु पर इस तरह के टकराव की अनुमति नहीं दी जाएगी, अदालत के समक्ष दायर वादपत्र या लिखित बयान के साथ ऐसे दस्तावेज़ के बिना निर्णय ने स्पष्ट किया [पैरा 31]। फैसले में कहा गया, "उपरोक्त चर्चा के प्रकाश में और इस अदालत के समक्ष पहले प्रश्न का उत्तर नकारात्मक है, जिसका अर्थ है कि गवाह के रूप में मुकदमे के पक्षकार और गवाह के बीच कोई अंतर नहीं है- इस अपील में दूसरा मुद्दा है, ऊपर देखे गए प्रावधानों के मद्देनजर, क्रॉस एक्जामिनेशन के चरण में मुकदमे के पक्ष और गवाह दोनों के लिए दस्तावेजों का उत्पादन, जैसा भी मामला हो, कानून के भीतर स्वीकार्य है।" [पैरा 32] जस्टिस करोल ने फैसले की शुरुआत में याद दिलाया कि मुकदमे का अंतिम उद्देश्य सत्य की खोज है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी उपस्थित हुए। एडवोकेट डॉ. आर.एस. सुंदरम प्रतिवादी की ओर से उपस्थित हुए।
 वाद शीर्षक:
 मोहम्मद अब्दुल वाहिद बनाम नीलोफर और अन्य


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