Monday, April 18, 2022

सुप्रीम कोर्ट में रामनवमी और हनुमान जयंती जुलूसों के दौरान सांप्रदायिक हिंसा की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाएं दाखिल


देश के विभिन्न राज्यों में रामनवमी और हनुमान जयंती के जुलूसों के दौरान सांप्रदायिक हिंसा की हालिया घटनाओं की पृष्ठभूमि में, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष तीन याचिकाएं दायर की गई हैं, जिसमें अदालत की निगरानी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच के हस्तांतरण सहित विभिन्न राहत की मांग की गई है।

एडवोकेट विशाल तिवारी और एडवोकेट विनीत जिंदल द्वारा दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं और एडवोकेट अमृतपाल सिंह खालसा द्वारा एक पत्र याचिका दायर की गई है।

हिंसा की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन, राज्यों द्वारा "बुलडोजर न्याय" की जांच हो : एडवोकेट विशाल तिवारी द्वारा जनहित याचिका

एडवोकेट विशाल तिवारी ने एक जनहित याचिका दायर कर रामनवमी और रमजान के अवसर पर राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और गुजरात में हुई धार्मिक झड़पों की जांच के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित करने का निर्देश देने की मांग की है।

याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में "बुलडोजर न्याय" की मनमानी कार्रवाई की जांच के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता के तहत एक न्यायिक जांच आयोग के गठन के लिए निर्देश देने की भी मांग की है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है, "इस तरह के कार्य पूरी तरह से भेदभावपूर्ण हैं और लोकतंत्र और कानून के शासन की धारणा में फिट नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्तियों से संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत जीवन और समानता के अधिकार के तहत उल्लंघन किया जाता है।"

घटनाएं आईएसआईएस और अन्य राष्ट्र विरोधी संगठनों के संभावित लिंक के साथ आतंकवाद के वित्तपोषण में शामिल होने का संकेत देती हैं ताकि हिंदुओं को लक्षित किया जा सके: एडवोकेट विनीत जिंदल द्वारा जनहित याचिका 

एडवोकेट विनीत जिंदल ने एक जनहित याचिका दायर कर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को निर्देश देने की मांग की है, दिल्ली के जहांगीर पुरी में हुई झड़पों सहित राजस्थान, गुजरात, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश राज्यों में और जेएनयू परिसर में हनुमान जयंती और रामनवमी पर देश के विभिन्न राज्यों में हुई सांप्रदायिक झड़पों के सभी मामलों की जांच की जाए।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि सात अलग-अलग राज्यों में देश भर में घटनाओं की श्रृंखला देश भर में हिंदुओं को लक्षित करने के लिए आईएसआईएस और अन्य राष्ट्र-विरोधी और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के संभावित लिंक के साथ आतंकी फंडिंग की भागीदारी का संकेत देती है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि हनुमान जयंती और रामनवमी के दिन, भक्तों को बंदूक की गोलियों से निशाना बनाया गया और पथराव किया गया, जिससे कई राज्यों में जुलूस में भक्तों को घायल कर दिया गया, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया।

याचिका में कहा गया है, "जुलूस के दौरान श्रद्धालुओं पर फायरिंग और पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ कर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाली हिंसा की हरकतें देश की संप्रभुता के लिए खतरा हैं और हिंदू समुदाय को जवाबी कार्रवाई के लिए उकसाती हैं क्योंकि धर्म समुदाय के मूल्यों का सार है।"

एडवोकेट अमृतपाल सिंह द्वारा पत्र याचिका

एडवोकेट अमृतपाल सिंह की पत्र याचिका में अदालत से जहांगीरपुरी दंगों में स्वत: संज्ञान लेने और अदालत की निगरानी में जांच शुरू करने का आग्रह किया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि निष्पक्ष मीडिया रिपोर्टों से यह सामने आया है कि कुछ सशस्त्र सदस्य, जो हनुमान जयंती शोभा यात्रा जुलूस का हिस्सा थे, ने मस्जिद में प्रवेश किया और भगवा झंडा लगाया, और इसके बाद दोनों समुदायों द्वारा पथराव किया गया। इस पूरी घटना में दिल्ली पुलिस के 7 से 8 कर्मी और आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि दिल्ली पुलिस की अब तक की जांच पक्षपाती, सांप्रदायिक रही है और दंगों की तैयारी करने वालों को सीधे तौर पर बचा रही है।

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