Thursday, July 22, 2021

शैक्षणिक टूर के दौरान विद्यालय की लापरवाही के कारण बीमार हुई छात्रा को रुपये 88,73,798/-की क्षतिपूर्ति की धनराशि के राज्य उपभोक्ता आयोग के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया।



सिविल अपील 2514/2021
KUM. AKSHATHA .....Appellant(s)
                     Versus
THE SECRETARY B.N.M. EDUCATION 
INSTITUTIONS & ANR.            ....Respondent(s)
न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा
न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी

परिवादी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता निवारण आयोग (इसके बाद के रूप में संदर्भित) 'राष्ट्रीय आयोग'  आदेश से व्यथित होकर अपील योजित की है जिसमे क्षतिपूर्ति की धनराशि रुपये ८८,७३,७९८/- से कम करके ५० लाख कर दी है।
शिकायतकर्ता १४ साल की उम्र की बच्ची थी
 बंगलौर के एक शैक्षणिक संस्थान में कक्षा ९ की छात्रा थी। विद्यालय के शिक्षक के संरंक्षण में दिसंबर, २००६ में, वह अन्य छात्रों के साथ उत्तर भारत के कई स्थानों पर एक शैक्षिक दौरे पर गई  दौरे के दौरान वायरल बुखार से ग्रस्त हो गई थी, बाद में मेनिंगो एन्सेफलाइटिस के रूप में उसके बीमारी का निदान किया गया।
डाक्टर ने बताया कि यदिनसमे रहते उसे चिकित्सीय सहायता और दवाई दी जाती तो उसका आसानी से इलाज किया जा सकता था।
अंतत: उसे एयरलिफ्ट करके 
 बैगलोर के लिए एयर एम्बुलेंस से लाया गया  इलाज के दौरान उसे लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहना पड़ा अन्य बातों के साथ-साथ उसकी स्मरण  बोलने की शक्ति भी प्रभावित हुई और 
 ठीक होने की कोई संभावना नहीं है।  वह एक सामान्य जीवन से वंचित है और
 विवाह योग्य आयु होने के बावजूद उसके विवाह की संभावनाएं नहीं हैं।
राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग उत्तरदाताओं द्वारा सकल लापरवाही के समवर्ती निष्कर्षों पर पहुंचे हैं कि शिकायतकर्ता और अन्य बच्चों के साथ शिक्षक अपने कर्तव्य के प्रदर्शन में लापरवाह थे।
हमें राज्य के निर्णयों के माध्यम से लिया गया है
 राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग, अपने स्वयं के तर्क और तथ्यों और साक्ष्य की जांच की पुष्टि की
 राज्य आयोग के निर्णय पर राष्ट्रीय आयोग ने पाया
अपील में कोई योग्यता नहीं है, जिसके हस्तक्षेप की आवश्यकता है।  हालांकि राष्ट्रीय आयोग का मत था कि ५० लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त होगा।
 इसमें कोई संदेह नहीं कि अपीलीय अधिकारी को क्षतिपूर्ति काम करने का अधिकार है।
राष्ट्रीय आयोग द्वारा यह नहीं बताया गया कि क्षतिपूर्ति किस आधार/शीर्षक के अंतर्गत क्षतिपूर्ति राशि बताई गई है और बिना किसी पर्याप्त कारण दर्शाये क्षतिपूर्ति के धनराशि कम कर दी है। 
बिना किसी सारवान एवम तार्किक विश्लेषण के क्षतिपूर्ति राशि कम कर देना मनमाना है। इसलिये संधार्य नहीं है।
हम उत्तरदाताओं के तर्क में योग्यता नहीं पाते हैं।
निष्पादन कार्यवाही में  अपीलकर्ता द्वारा आदेश के अनुसार मुआवजे में कमी के लिए  द्वारा कोई आपत्ति नहीं उठाई गई है।
 परिणाम में अपील स्वीकार की जाती है।  
 राज्य आयोग द्वारा निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि (award)  बहाल किया जाता है।
14 जुलाई 2021

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