Tuesday, May 21, 2024

किशोर होने की दलील किसी भी अदालत में और किसी भी स्तर पर, यहां तक ​​कि मामले के अंतिम निपटारे के बाद भी उठाई जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट


हाल के एक आदेश में, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की सर्वोच्च न्यायालय (एससी) पीठ ने कहा कि मामले के अंतिम निपटारे के बाद भी, किसी भी अदालत में और किसी भी स्तर पर किशोर होने की दलील उठाई जा सकती है। पीठ ने आगे टिप्पणी की, "यह बिना किसी संदेह के कहा जा सकता है कि अपीलकर्ता द्वारा उठाई गई किशोर होने की दलील को उचित जांच किए बिना खारिज नहीं किया जा सकता था।" शीर्ष अदालत पटना उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में, अपीलकर्ता और सह-अभियुक्तों पर भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 302 और 394 और शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 27 (2) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए विद्वान प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा मुकदमा चलाया गया था। ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता और सह-अभियुक्तों को उपरोक्त अपराधों के लिए दोषी ठहराया और उन्हें मौत की सजा सुनाई।

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