Monday, June 13, 2022

सर्वोच्च न्यायालय का अहम आदेश: लंबे समय तक बिना शादी के साथ में रहने से संबंध विवाह की तरह होगा, बच्चों को पैतृक संपत्ति में मिलेगा हिस्सा।


उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक साथ रहते हैं तो कानून के मुताबिक, इसे विवाह जैसा ही माना जाएगा और उनके बेटे को पैतृक संपत्तियों में हिस्सेदारी से वंचित नहीं किया जा सकता है।उच्चतम न्यायालय ने केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि विवाह के सबूत के अभाव में एक साथ रहने वाले पुरुष और महिला का नाजायज बेटा पैतृक संपत्तियों में हिस्सा पाने का हकदार नहीं है। 

उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बहाल किया
न्यायाधीश अब्दुल नजीर और न्यायाधीश विक्रम नाथ की पीठ ने कहा, ''यह साफ है कि अगर एक पुरुष और एक महिला पति और पत्नी के रूप में लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, तो इसे विवाह जैसा ही माना जायेगा। इस तरह का अनुमान साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के तहत लगाया जा सकता है। ''

कोर्ट ने कहा, ''यह अच्छी तरह से तय है कि अगर एक पुरुष और एक महिला पति और पत्नी के तौर पर लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, तो विवाह के पक्ष में अनुमान लगाया जाएगा।'' उच्चतम न्यायालय ने ये फैसला केरल हाईकोर्ट के 2009 के एक फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया।

उच्च न्यायालय ने क्या कहा था? 
केरल उच्च न्यायालय ने एक पुरुष और महिला के बीच लंबे समय तक चले रिश्ते के बाद पैदा हुए एक बच्चे को पैतृक संपत्तियों में हिस्सा देने के निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस बात का कोई सुबूत नहीं है कि याचिकाकर्ता के माता-पिता लंबे समय तक साथ-साथ रहे। दस्तावेजों से सिर्फ यह साबित होता है कि याचिकाकर्ता दोनों का पुत्र है, लेकिन वह वैध पुत्र नहीं है, इसलिए हाईकोर्ट ने संपत्ति बंटवारे से इंकार कर दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने क्या कहा ?
उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को रद्द करते हुए कहा कि जब महिला और पुरुष ने ये सिद्ध कर दिया कि वे पति और पत्नी की तरह रहे हैं, तो कानून यह मान लेगा कि वे वैध विवाह के परिणामस्वरूप एक साथ रह रहे थे। साथ ही कोर्ट ने देश भर के ट्रायल कोर्टों से कहा है कि वे स्वत: संज्ञान लेते हुए फाइनल डिक्री पारित करने की प्रक्रिया में तत्परता दिखाएं। 

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