Sunday, April 17, 2022

तलाकशुदा मुस्लिम महिला जब तक पुनर्विवाह नहीं करती, तब तक वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पति से गुजारे भत्ते का दावा कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट


केस का शीर्षक - रजिया बनाम उत्तर प्रदेश राज्य 

संक्षेप में मामला

ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता/मुस्लिम महिला द्वारा दायर सीआरपीसी की धारा 125 के तहत आवेदन की अनुमति पांच मुद्दों को तय करने के बाद दी। विचारण न्यायालय द्वारा पारित आदेश से व्यथित होकर प्रतिवादी नंबर दो/पति ने अपीलीय न्यायालय के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर की।

अपीलीय न्यायालय/एएसजे ने प्रतिवादी नंबर एक/मुस्लिम महिला के पक्ष में दिया गया 1000/- रुपये के भरण-पोषण भत्ता रद्द कर दिया और प्रतिवादी नंबर दो और तीन (बच्चे) का भरण-पोषण भत्ता 500 रुपये प्रति माह से घटाकर 250 रुपये प्रति माह कर दिया।

अपीलीय न्यायालय ने दानियाल लतीफी और एक अन्य बनाम भारत संघ एआईआर 2001 एससी 3958 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए केवल इस आधार पर संशोधन की अनुमति दी कि चूंकि प्रतिवादी नंबर एक को प्रतिवादी नंबर दो द्वारा तलाकशुदा है, इसलिए, दोनों मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 द्वारा शासित हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शबाना बानो बनाम इमरान खान के मामले में निर्धारित कानून को दोहराते हुए कहा कि एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला इद्दत की अवधि समाप्त होने के बाद भी जब तक वह पुनर्विवाह नहीं करती, सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार होगी।

जस्टिस करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने मई 2008 में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, प्रतापगढ़ द्वारा पारित निर्णय और आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका को अनुमति देते हुए जनवरी, 2007 में पारित ट्रायल कोर्ट के आदेश को संशोधित करते हुए उक्त टिप्पणी की।

संक्षेप में मामला

ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता/मुस्लिम महिला द्वारा दायर सीआरपीसी की धारा 125 के तहत आवेदन की अनुमति पांच मुद्दों को तय करने के बाद दी। विचारण न्यायालय द्वारा पारित आदेश से व्यथित होकर प्रतिवादी नंबर दो/पति ने अपीलीय न्यायालय के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर की।

अपीलीय न्यायालय/एएसजे ने प्रतिवादी नंबर एक/मुस्लिम महिला के पक्ष में दिया गया 1000/- रुपये के भरण-पोषण भत्ता रद्द कर दिया और प्रतिवादी नंबर दो और तीन (बच्चे) का भरण-पोषण भत्ता 500 रुपये प्रति माह से घटाकर 250 रुपये प्रति माह कर दिया।

अपीलीय न्यायालय ने दानियाल लतीफी और एक अन्य बनाम भारत संघ एआईआर 2001 एससी 3958 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए केवल इस आधार पर संशोधन की अनुमति दी कि चूंकि प्रतिवादी नंबर एक को प्रतिवादी नंबर दो द्वारा तलाकशुदा है, इसलिए, दोनों मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 द्वारा शासित हैं।

अदालत ने आगे तर्क दिया कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाएं इद्दत के चरण के बाद भी उपरोक्त अधिनियम की धारा 3 और धारा 4 के तहत भरण-पोषण पाने की हकदार हैं, इसलिए वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण प्राप्त करने की हकदार नहीं हैं

कोर्ट ने कहा था कि चूंकि पत्नी ने तलाक स्वीकार कर लिया है, इसलिए वह मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों द्वारा निर्देशित होगी। उसके द्वारा दायर सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग करने वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं होगी।

न्यायालय की टिप्पणियां और आदेश

शुरुआत में कोर्ट ने नोट किया कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत प्रावधान लाभकारी कानून हैं और इसका लाभ तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को मिलना चाहिए। इसके अलावा, शबाना बानो मामले (सुप्रा) पर भरोसा करते हुए अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत इद्दत की अवधि समाप्त होने के बाद भी जब तक वह पुनर्विवाह नहीं करती, अपने पति से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार होगी।

कोर्ट ने कहा,

"शबाना बानो (सुप्रा) के पूर्वोक्त निर्णय के मद्देनजर, मुझे यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि अपीलीय न्यायालय द्वारा लिया गया विचार माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत है। प्रतिवादी नंबर एक तलाकशुदा है। मुस्लिम महिलाएं सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने की हकदार हैं। निचली अदालत द्वारा पारित आदेश में कोई अवैधता नहीं है।"

तदनुसार, शबाना बानो (सुप्रा) मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के मद्देनजर अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश को निरस्त किया गया।

हालांकि, ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित आदेश को इस हद तक संशोधित किया गया कि याचिकाकर्ता को सीआरपीसी की धारा 125 के तहत आवेदन दाखिल करने की तारीख से प्रतिवादी नंबर दो द्वारा भरण-पोषण का भुगतान किया जाएगा (मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर) रजनीश बनाम नेहा और अन्य)।

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