Saturday, June 7, 2025

गवाहों को प्रभावित करने पर पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी की जमानत निरस्त


कर्नाटक में भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में गवाहों को प्रभावित करने पर कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रद कर दी। न्यायालय ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को जमानत की शर्तों के उल्लंघन के आधार पर जमानत रद करने के लिए याचिका स्वीकार करने का अधिकार है, भले ही जमानत सुप्रीम कोर्ट ने दी हो।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि रिकार्ड में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं जो दर्शाते हैं कि कुलकर्णी ने गवाहों से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने का प्रयास किया गया था। इसलिए जमानत रद की जाती है। अदालत ने कुलकर्णी को शुक्रवार से एक सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट या जेल प्राधिकरण के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश सीबीआइ के माध्यम से दायर की गई कर्नाटक राज्य की अपील पर दिया है। याचिका में बेंगलुरु के एक ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। इससे पहले सीबीआइ ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष कुलकर्णी सहित दो आरोपितों को दी गई जमानत रद करने के लिए याचिका दायर की थी। ट्रायल कोर्ट ने कुलकर्णी मामले में हस्तक्षेप करने से यह कहते हुए कि इन्कार कर दिया, उन्हें अगस्त 2021 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जमानत दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआइ की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि आरोपित ने गवाहों से संपर्क करने और उन्हें प्रभावित करने का प्रयास किया। कुलकर्णी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि कुलकर्णी ने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां अपीलकर्ता की उस याचिका तक सीमित हैं जिसमें प्रतिवादी को दी गई जमानत को रद करने की मांग की गई है। पीठ ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिन सुनवाई शीघ्रता से पूरा करने का प्रयास करे। स्मरण रहे कि योगेश गौड़ा भाजपा के जिला पंचाय सदस्य थे। जून 2016 में धारवा जिले में उनकी हत्या कर दी गई थी। सितंबर 2019 में राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी थी।

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