Tuesday, July 27, 2021

जनहित याचिका में निजी विवाद सन्निहित, जनहित में न होने के कारण याचिका निरस्त- इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद उच्च न्यायालय
न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल व सौरभ लवानिया
नरेंद्र कुमार यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य
जनहित याचिका सिविल 19497/2020

एक व्यक्ति, जिसे कानूनी चोट लगती है या जिसके कानूनी अधिकार का उल्लंघन होता है, उसे न्याय के गर्भपात से बचने के लिए रिट अधिकार क्षेत्र को लागू करने का अधिकार है। ढील दी जा सकती है, जहां गरीब, वंचित, अनपढ़ या विकलांग व्यक्तियों की ओर से न्यायालय के समक्ष शिकायत की जाती है, जो कानूनी गलत के निवारण के लिए स्वतंत्र रूप से न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटा सकते हैं।
भारत का संविधान, १९५० अनुच्छेद २२६ जनहित याचिका  मैसर्स रश्मी मेटालिक्स लिमिटेड, कोलकाता  का निरीक्षण करने के लिए जारी पत्र दिनाँक 18.9.2020 को याचिकाकर्ता याचिका रद्द करने की मांग और परमादेश जारी करने के लिए प्रतिवादी संख्या 2 और 3 को पुन: निरीक्षण की अनुमति नहीं देने के लिए याचिकाकर्ता, सामाजिक कार्य करने में अपने अधिकार या विशेषज्ञता को स्थापित करने के लिए किसी भी दस्तावेजी सबूत के अभाव में अपेक्षित नहीं है।  जनहित में याचिका दायर करने की साख - याचिकाकर्ता ने जनहित में इस याचिका को दायर करने में यह भी खुलासा नहीं किया है कि वह ऐसे वंचित व्यक्तियों की ओर से यह याचिका दायर कर रहा है या कि बड़ी संख्या में लोगों के साथ अन्याय हुआ है और इसलिए यह आवश्यक हो गया है - उनकी ओर से याचिकाकर्ता को जनहित में इस याचिका को बनाए रखने का अधिकार नहीं था, वह भी ऐसे मामले में जिसमें बुनियादी मानवाधिकार शामिल नहीं हैं - याचिका खारिज कर दी गई।

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